संपादक नयन टवली की कलम से ✍️

झाबुआ – कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने पुलिस अधीक्षक , झाबुआ द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण उपरांत गंभीर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त आरोपी परबल/प्रबल उर्फ अश्वीन पिता जुवानसिंह मेडा (26 वर्ष) , निवासी ग्राम वागनेरा, थाना कालीदेवी , जिला झाबुआ के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3(2) के अंतर्गत निरोधात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं , पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार संबंधित आरोपी वर्ष 2015 से लगातार विभिन्न गंभीर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है । उसके विरुद्ध हत्या के प्रयास , मारपीट , लूट , अपहरण , बलवा , चोरी , अवैध शस्त्र रखने सहित अन्य गंभीर प्रकरण दर्ज हैं । प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अवैध शस्त्रों के साथ फोटो एवं वीडियो साझा किए जाते रहे हैं , जिससे क्षेत्र में भय एवं असुरक्षा का वातावरण निर्मित हुआ है तथा लोक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है , जिला दण्डाधिकारी ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि पुलिस प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेखों के विस्तृत परीक्षण के उपरांत यह संतोषजनक रूप से पाया गया कि आरोपी की गतिविधियां लोक व्यवस्था एवं सार्वजनिक शांति के लिए प्रतिकूल हैं तथा सामान्य न्यायिक प्रक्रिया से उन पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण संभव प्रतीत नहीं होता । ऐसी परिस्थितियों में लोक व्यवस्था बनाए रखने एवं सार्वजनिक हित की दृष्टि से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत निरोधात्मक कार्रवाई आवश्यक है , मध्यप्रदेश शासन, गृह विभाग द्वारा 01 जुलाई 2026 को प्रकाशित अधिसूचना के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला दण्डाधिकारी ने आरोपी को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3(2) के तहत आदेश दिनांक से तीन माह की अवधि के लिए निरुद्ध किए जाने के आदेश जारी किए हैं। आदेशानुसार आरोपी को केन्द्रीय जेल, इंदौर में निरुद्ध रखा जाएगा , जिला दण्डाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक झाबुआ को आदेश के क्रियान्वयन , निरोध आदेश एवं संबंधित दस्तावेजों की विधिवत तामील कराने तथा प्रकरण अनुमोदन हेतु मध्यप्रदेश शासन , गृह विभाग को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए हैं। आदेशानुसार आरोपी को नियमानुसार मध्यप्रदेश शासन , गृह विभाग , भारत सरकार के गृह मंत्रालय तथा जिला दण्डाधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने एवं सलाहकार बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का वैधानिक अधिकार भी उपलब्ध रहेगा ।





