संपादक नयन टवली की कलम से ✍️


झाबुआ – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा जिले में नवीन जल संसाधन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है , यह स्वीकृति महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया एवं कलेक्टर नेहा मीना के विशेष प्रयासों से संभव हो सकी है , पेटलावद क्षेत्र में कुल 15.8 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न जल संसाधन परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से लगभग 480 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे कृषकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा , स्वीकृत परियोजनाओं में मुंडत बैराज (लागत 5.99 करोड़ रुपये) से 360 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा, मुकामपुरा तालाब नहर रहित योजना (लागत 3.53 करोड़ रुपये) से 120 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी , इसके अतिरिक्त माही नदी पर स्थित श्रृंगेश्वर घाट के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य हेतु 628.21 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे नदी तटों की सुरक्षा, संरक्षण एवं धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा , महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने एवं जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है , पेटलावद क्षेत्र में स्वीकृत जल संसाधन परियोजनाएं किसानों के लिए वरदान सिद्ध होंगी तथा क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेंगी , उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट को धन्यवाद प्रेषित किया ।
कलेक्टर नेहा मीना ने श्रृंगेश्वर घाट को लेकर कहा कि माही नदी के श्रृंगेश्वर घाट का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण धार्मिक आस्था के साथ-साथ नदी संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है , कलेक्टर ने कहा कि आगामी 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ के तहत श्रृंगेश्वर धाम को शिवलिंग के टूरिस्ट सर्किट में जोड़ने के प्रयास किये जाएंगे , साथ ही प्रदेश के टूरिज्म सर्किट में शामिल कराया जाएगा। उन्होंने इसे जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग श्री विपिन पाटीदार , समस्त टीम एवं जिले वासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी , आपको बता दे कि श्रृंगेश्वर घाट के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी , सुव्यवस्थित एवं आकर्षक घाट विकसित होने से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी , जिससे स्थानीय व्यापार , होटल , भोजनालय , परिवहन एवं अन्य सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे , घाट के सौंदर्यीकरण से धार्मिक आयोजनों , पर्व-त्योहारों एवं अनुष्ठानों का आयोजन सुचारु रूप से हो सकेगा , जिससे क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान सशक्त होगी। साथ ही, नदी तट के संरक्षण कार्यों से स्वच्छता, सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित होगा , धार्मिक पर्यटन के बढ़ने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी , स्थानीय हस्तशिल्प एवं उत्पादों को बाजार मिलेगा तथा श्रृंगेश्वर घाट एक प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होकर जिले की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा ।





