संपादक नयन टवली की कलम से ✍️


आलीराजपुर – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त पूरे भारतवर्ष में 01 जनवरी से मण्डल व बस्ती स्तर पर हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा हैं , जिसके तहत 03 जनवरी को छकतला खण्ड के छकतला मण्डल में विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन सम्पन्न हुआ , इस विशाल हिंदू सम्मेलन में छकतला मंडल के छकतला , धोरट , जामली , कटवाड़ , भोपालिया , कडवानिया एवं बयड़िया ग्रामों से सैकड़ो की संख्या में माता-बहने, बाल-गोपाल एवं हिंदू समाज के वरिष्ठजनों की उपस्थिति रही , हिन्दू सम्मेलन में न केवल मातृशक्ति सहित सकल हिन्दू समाज की उत्साहपूर्वक भागीदारी हो रही है बल्कि साधु एवं सन्त महात्माओं द्वारा भी खुले हृदय से आशीर्वचन प्रदान किए जा रहे हैं , कुल मिलाकर इन हिन्दू सम्मेलन की सकल हिन्दू समाज द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है , इन सम्मेलन का आयोजन दरअसल सकल हिन्दू समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा मिलकर किया जा रहा है, जिससे समाज के समस्त अंगों में आपस में भाईचारे के भाव बढ़ रहे हैं साथ ही छोटे छोट आपसी मतभेद समाप्त होकर, विशेष रूप से युवा नागरिकों को हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों से अवगत होने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है , इन हिन्दू सम्मेलन के आयोजन का उद्देश्य भी सनातन संस्कृति , सनातन धर्म और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना है, जिसकी प्राप्ति होती हुई दिख रही है , कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान चालीसा से की गई, तत्पश्चात मंचासीन महानुभवों का आयोजन समिति द्वारा श्रीफल व साहित्य से स्वागत किया गया तथा मुख्य वक्ता श्री केतन जी भाईसाहब का तीर धनुष भेंट कर सम्मान किया गया , कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री रुमालसिंह अवास्या ने अपने उद्बोधन में कहा कि- अब हमे जाति-पाति, समाज-भाषा के मतभेदों में नहीं उलझना हैं, अब हमे योजनाबद्ध तरीके से सभी को एकजुट होकर, हिन्दू के आधार पर समाज के लिए कार्य करने की आवश्यकता हैं | महिला वक्ता श्रीमती दीपिका राठौड़ ने पंच परिवर्तन के विषय पर अपना विषय रखते हुए पर्यावरण, नागरिक अनुशासन, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता एवं स्वदेशी बिंदुओं पर सारगर्भित प्रकाश डाला , सामाजिक वक्त के रूप में वगेसिंह पटेल ग्राम जामली ने अपने दिव्य ग्राम जामली की परिकल्पना को रखा एवं उपस्थित साधु संतों द्वारा हिन्दू धर्म की महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला गया , मुख्य वक्ता श्री केतन जी सोजित्रा सह प्रांत प्रचारक मालवा प्रांत ने स्थानीय बोली व गुजराती में अपना वक्तव्य देते हुवे कहा कि- आज हिंदुत्व यदि सशक्त होता है तो यह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के हित में होगा, क्योंकि आज विश्व के विभिन्न देशों में फैली अशांति को दूर करने में केवल सनातन हिंदू संस्कृति ही सक्षम दिखाई दे रही है और इस विषय को विभिन्न देशों में फैले भारतीय मूल के नागरिकों के माध्यम से विकसित एवं अन्य देशों के नागरिक भलीभांति समझने लगे हैं क्योंकि इन देशों में निवासरत भारतीय मूल के नागरिक सनातन हिंदू संस्कृति के संस्कारों का अनुपालन करते हुए दिखाई देते हैं जिनमें “वसुधैव कुटुम्बकम” का भाव दिखाई देता है। इन देशों में समस्त भारतीय मूल के नागरिक शांतिपूर्वक अपना जीवन यापन करते हैं एवं वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था में अपना सशक्त योगदान देते हुए दिखाई देते हैं , और फिर , भारत के भी आज विश्व के लगभग समस्त देशों के साथ दोस्ताना सम्बंध हैं, भारत ने कभी भी किसी देश की जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से किसी देश के साथ युद्ध नहीं किया है । भारत सदैव से ही “जियो और जीने दो” के सिद्धांत का अनुपालन करता आया है , बल्कि , विश्व के अन्य देशों के नागरिक, जैसे, शक, हूण, कुषाण, पारसी, यहूदी, ईसाई एवं मुस्लिम भी भारत आकर आसानी से यहां रच बस गए हैं , मुख्य वक्ता ने आगे कहा कि- संघ की दृष्टि बहुत स्पष्ट है कि सम्पूर्ण भारत की पहचान जिससे है , उस आध्यात्म आधारित एकात्म और सर्वांगीण जीवन दृष्टि को दुनिया हिंदुत्व अथवा हिंदू जीवन दृष्टि के नाते जानती है, उस हिंदुत्व को जगाकर सम्पूर्ण समाज को एक सूत्र में जोड़कर निर्दोष और गुणवान हिंदू समाज के संगठन का यह कार्य जो वर्ष 1925 में प्रारम्भ हुआ, वह आज भी निरन्तर जारी है और आगे भी जारी रहेगा , सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित किए जा रहे हिन्दू सम्मेलन भी उक्त दृष्टि को ही साकार करते हुए दिखाई दे रहे हैं, अंत में मुख्य वक्ता ने “हिन्दू धर्म हमारी जीवन जीने की पद्धति हैं” कहते हुए वक्तव्य को विराम दिया हैं , इसके बाद भारत माता की दिव्य आरती हुई , मंच पर आसपास के संत महात्मा, सभी गांव के पटेल एवं समाज प्रमुख उपस्थित रहे | कार्यक्रम का संचालन श्री राहुल अवास्या एवं श्री पीयूष वाणी ने आभार व्यक्त किया ।





