संपादक नयन टवली की कलम से ✍️

आलीराजपुर – देश के सभी गांवों , गरीबों और किसानों के चहुमुखी विकास एवं जरूरतमंदों को ग्राम स्तर पर रोजगार दिलाने के लिए ही केन्द्र सरकार द्वारा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अर्थात वीबी जी-राम-जी अधिनियम 2025 लागू किया गया है , हर हाथ को काम मुहैया कराने के लिए इस अधिनियम में एक ग्रामीण परिवार को अब 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है , मनरेगा अधिनियम में रोजगार की यह गारंटी मात्र 100 दिन की थी , वीबी जी-राम-जी योजना देश के सभी गांवों की तस्वीर बदल देगी है , यह गरीबों , खेतीहर मजदूरों, किसानों सभी के लिए बेहद लाभकारी है। इस योजना से गांवों के विकास को भी मजबूती मिलेगी , यह बात भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष संतोष मकू परवाल ने वीबी जी राम जी जनजागरण अभियान के संदर्भ में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कही , भाजपा जिलाध्यक्ष परवाल ने कहा कि पहले किसानों को कृषि से जुड़े कामों के लिए श्रमिक ही नहीं मिलते थे, पर वीबी जी – राम – जी योजना में कृषि के व्यस्ततम समय , विशेष कर बुवाई और कटाई के समय पर्याप्त मात्रा में कृषि श्रमिकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। इस अधिनियम में राज्यों को एक वित्त वर्ष में कुल 60 दिन की अवधि अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है , बीज बुवाई एवं फसल कटाई की व्यस्ततम समयावधि को भी रोजगार उपलब्ध कराने की अवधि में शामिल किया जा सकेगा। प्रावधान के अनुसार इस अवधि में अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित अन्य कार्य नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस योजना के क्रियान्वयन के लिए केन्द्र सरकार तय मानकों के आधार पर देश के हर राज्य को एक निश्चित राशि भी देगी , अधिनियम में ग्रामीण आजीविका निर्माण के स्थाई स्रोत विकसित करने पर जोर दिया गया है , इससे ग्रामीणों के देशज ज्ञान, कौशल , उद्यमिता और उनमें निहित कला प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।इस अधिनियम में बेरोजगारी भत्ता और विलम्बित मजदूरी देने का भी प्रावधान रखा गया है , इसमें तहत यदि किसी ग्रामीण परिवार को उसके मांग करने के बावजूद तय समय सीमा के भीतर काम नहीं दिया जाता है , तो राज्य सरकार तय की गई दरों एवं शर्तों के अनुसार संबंधित मांग कर्ता परिवार को बेरोजागारी भत्ता देने के लिए भी बाध्य होगी। इसी तरह काम पूरा कर लेने के बाद भी यदि किसी कारण वश मजदूर को उसकी निर्धारित मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है, तो मुआवजे के तहत उसे विलम्बित मजदूरी के रूप में अतिरिक्त राशि देने का प्रावधान भी इस अधिनियम में है , हितग्राही मूलक रोजगार कार्यों के लिए अनुसूचित जाति , जनजाति , गैर अधिसूचित जनजातियां, खानाबदोश , आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग , महिला मुखिया परिवार , दिव्यांग मुखिया परिवार, भूमि सुधार के हितग्राही, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं वन अधिकार अधिनियम के हितग्राही, छोटे और सीमान्त किसानों को इस अधिनियम में प्राथमिकता दी जायेगी , जिलाध्यक्ष परवाल ने बताया कि अधिनियम में पंचायती राज संस्थाओं – ग्रामसभा , ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा राज्य रोजगार गारंटी परिषद को भी स्पष्ट जिम्मेदारियां दी गई हैं , अधिनियम में विकसित भारत जी-राम-जी स्कीम में शुरु किए गए निर्माण कार्यों की जियो – टैगिंग , डिजीटल रिकॉडिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली तथा नियोजित किए गए सभी मजदूरों को तेजी से समुचित भुगतान देने के लिए डिजीटल तथा बायोमैट्रिक भुगतान प्रणाली और ग्रामसभा द्वारा सोशल ऑडिट द्वारा योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी , जिला महामंत्री मोंटू शाह एवं जिला उपाध्यक्ष हितेंद्र शर्मा ने कहा कि अधिनियम में पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न स्तरों पर एक समयबद्ध एवं शिकायत निवारण तंत्र तथा कुछ दंडात्मक प्रावधान भी किए गए हैं , इसके लिए शिकायतों के निवारण में पारदर्शिता और इसकी मॉनिटरिंग के लिए शिकायत प्रबंधन सूचना प्रणाली की डिजीटल व्यवस्था स्थापित की जाएगी। इस योजना में ग्रामीण परिवार को 100 के स्थान पर 125 दिन के अकुशल श्रम दिवस के रोजगार की गारंटी होगी। वन क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति परिवारों को 25 दिवस का अतिरिक्त रोजगार मिलेगा , युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष एवं विधायक प्रतिनिधि गोविंदा गुप्ता ने बताया कि योजना अंतर्गत जल संरक्षण संवर्धन के कार्य,आजीविका संबंधी बुनियादी ढांचे के कार्य का, कोर – ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास कार्य,मौसमी घटनाओं से निपटने के लिये कार्य, बेहतर भुगतान व्यवस्था -वर्तमान के 15 दिवस के स्थान पर 7 दिवस में मजदूरों को भुगतान की व्यवस्था , पारदर्शिता एवं जवाव देही- वायोमेट्रिक हाजिरी, तकनीकी का बेहतर उपयोग से पारदर्शिता पर जोर रियल टाइम डाटा अपेडट , मोबाइल मॉनिटरिंग एवं जीपीएस तकनीकी का उपयोग , योजना को – पीएम गतिशक्ति के साथ जोड़ा गया, एवं विकास कार्यों की आवश्यकता के अनुरूप पंचायतों को तीन श्रेणी ए बी सी में वर्गीकरण की व्यवस्था। कटाई एवं बुवाई के समय मे 60 दिवस श्रमिकों को रोजगार नहीं दिए जाने की व्यवस्था, ताकि कृषि कार्य हेतु किसानो को मजदूर उपलब्ध हो सकें , केन्द्र राज्य का अनुपात 60:40 के अनुपात में रखा गया है पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्यों के लिये 10:10 बेहतर मॉनिटरिंग के लिए प्रशासनिक व्यय को 6% से बढाकर 9% किया गया है। बजट आबंटन में वृद्धि- वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए मनरेगा में 86000 करोड़ के स्थान पर अब इस योजना में 1.51 लाख करोड़ का केंद्र सरकार ने प्रावधान किया है , मजदूरों को विलम्ब से भुगतान किये जाने पर विलंबित क्षतिपूर्ति का प्रावधान है , उक्त जानकारी नगर मंडल मीडिया प्रभारी चिराग थेपड़िया द्वारा दी गई ।





