संपादक नयन टवली की कलम से ✍️

झाबुआ – राज्य शासन द्वारा घोषित कृषि कल्याण वर्ष 2026 के उद्देश्य के अनुरूप गौसंवर्धन , पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर नेहा मीना ने जिले की चारोलीपाड़ा गौशाला का निरीक्षण किया । निरीक्षण के दौरान उन्होंने गौशाला में उपलब्ध व्यवस्थाओं, गौवंश की देखभाल, चारे की उपलब्धता, जल व्यवस्था तथा परिसर में उपलब्ध संसाधनों का अवलोकन कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए , निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गौशाला परिसर के समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए । उन्होंने परिसर में चारा उत्पादन क्षेत्र विकसित करने , स्थल को अधिक आकर्षक एवं रमणीय बनाने तथा गौशाला के समग्र विकास हेतु तैयार विस्तृत परियोजना को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध एवं चरणबद्ध तरीके से विकास कार्य किए जाने से गौशाला का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा , कलेक्टर ने गौवंश के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गौशाला परिसर में स्थित तालाब के गहरीकरण एवं कुएं के गहरीकरण की कार्यवाही कराने के निर्देश भी दिए, ताकि वर्षभर पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके और पशुओं के लिए जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो , गौशाला की सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए कलेक्टर ने परिसर में बाउंड्री वॉल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाउंड्री वॉल के निर्माण से गौशाला का संचालन अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित रूप से किया जा सकेगा , निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गौशाला के समग्र एवं सतत विकास पर विशेष जोर देते हुए परिसर में फलदार वृक्षों का रोपण करने के निर्देश दिए । उन्होंने कहा कि फलदार पौधों के माध्यम से न केवल परिसर में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भविष्य में गौशाला के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित हो सकेंगे, जिससे गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिलेगी , कलेक्टर ने जैविक खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट निर्माण को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि इस कार्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित स्व-सहायता समूहों की दीदियों को जोड़ा जाए। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि स्व-सहायता समूहों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं , ताकि उन्हें वर्मी कम्पोस्ट एवं जैविक खाद निर्माण की तकनीकी जानकारी मिल सके और वे व्यवस्थित रूप से इस कार्य को संचालित कर सकें ।

इस दौरान कलेक्टर ने उपस्थित स्व-सहायता समूह की दीदियों से संवाद कर उनके रुझान एवं सहभागिता के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा उन्हें इस कार्य से जुड़कर गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया , निरीक्षण के दौरान गौशाला में पशुधन की संख्या अपेक्षाकृत कम पाए जाने पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य स्थानों से पशुधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। साथ ही निराश्रित पशुओं को आवश्यक जांच उपरांत गौशाला में आश्रय देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि गौशाला की उपलब्ध क्षमता का पूर्ण उपयोग किया जा सके , कलेक्टर ने कहा कि गौशालाओं का सुव्यवस्थित संचालन केवल गौसंरक्षण ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक खेती और स्व-सहायता समूहों की आजीविका को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए गौशाला के विकास एवं प्रबंधन को प्रभावी बनाएँ , इस दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जितेन्द्र सिंह चौहान , उप संचालक पशुपालन विभाग डॉ . ए एस दिवाकर, संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी गौशाला संचालक एवं आजीविका मिशन की दीदियां भी उपस्थित रहे ।










