संपादक नयन टवली की कलम से ✍️

जबलपुर – कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह द्वारा दिखाई गई सख्ती ने उमरिया जिले के 25 श्रमिकों को न केवल बकाया मजदूरी का मौके पर ही भुगतान किया गया , बल्कि कलेक्टर ने उन्हें भोजन कराने के बाद बस से उमरिया तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की , मामला मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की कुंडम परियोजना मंडल के चिरापोंडी परिक्षेत्र की बलिवाड़ा बीट के कम्पार्टमेंट क्रमांक-154 में कंटूर ट्रेंच, पौधारोपण के लिये गड्ढे करने के काम में लगे उमरिया जिले के लगभग 25 श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं किये जाने का था। इन श्रमिकों से काम तो करा लिया गया लेकिन मजदूरी का बड़ा हिस्सा वन विभाग के बीट गार्ड द्वारा रोक लिया गया था। बकाया राशि माँगने पर इन श्रमिकों को डराया-धमकाया भी जा रहा था , मजदूरी की इसी बकाया राशि को दिलाने की मांग को लेकर ये श्रमिक परिवार जनों सहित कलेक्टर से मिलने मंगलवार दो जून की दोपहर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे । कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुये न केवल इन श्रमिकों से भेंट की बल्कि उनकी समस्या को ध्यान पूर्वक सुना और उनकी परेशानियों को समझा । उन्होंने सहायक श्रम आयुक्त को फौरन कलेक्टर कार्यालय आने और वन विभाग से समन्वय स्थापित कर श्रमिकों को तुरंत उनकी बकाया मजदूरी का भुगतान कराने के निर्देश दिये , इस पूरे प्रकरण में कलेक्टर सिंह की संवेदनशीलता एक बार और तब दिखाई दी जब उन्होंने इन श्रमिकों और उनके साथ आये बच्चों को इंडियन कॉफी हाउस से बुलवाकर भोजन कराने तथा उमरिया तक पहुंचाने के व्यवस्था करने के निर्देश अधिकारियों दिये , कलेक्टर की सख्ती को देख हरकत में आये श्रम और वन विभाग के अधिकारियों ने उमरिया जिले के इन श्रमिकों को 3 लाख 86 हजार रूपये की बकाया मजदूरी का भुगतान कराया। श्रमिकों को बकाया राशि का भुगतान कराने में सहायक श्रमायुक्त पवन मंडोत की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही । उन्होंने और श्रम निरीक्षक ऋषि पटेल ने न केवल वन विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाये रखा बल्कि आखिरी तक श्रमिकों के साथ रहे और रात हो जाने पर उन्हें बस से उमरिया तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की ।





