संपादक नयन टवली की कलम से ✍️

आलीराजपुर – कहते हैं कि यदि प्रशासनिक मुखिया में दृढ़ इच्छाशक्ति और आमजन की तकलीफों को दूर करने का जज्बा हो, तो बरसों पुरानी और जटिल से जटिल समस्याएं भी पल भर में काफूर हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है आलीराजपुर कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने । उनके त्वरित निवारण के संकल्प और संवेदनशीलता के कारण जिला प्रशासन की जनसुनवाई अब आम जनता के लिए सच्ची उम्मीद की किरण बन चुकी है। इसका ताजा और सुखद परिणाम विकासखंड सोंडवा की ग्राम पंचायत अम्बाजा के ग्राम गोलापलवी (भील फलिया) में देखने को मिला है, जहां पिछले 10 वर्षों से चला आ रहा गंभीर पेयजल संकट महज एक जनसुनवाई के बाद हमेशा के लिए खत्म हो गया ।
कलेक्टर की संवेदनशीलता से मिला त्वरित न्याय :- दरअसल , दशकों से पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे इस आदिवासी क्षेत्र की व्यथा को पिछली जनसुनवाई में भील फलिया निवासी केवसीय पिता अगरिया ने कलेक्टर नीतू माथुर के समक्ष रखा था । आवेदन में बताया गया था कि फलिया के 12 से 15 परिवारों को भीषण गर्मी में पीने के पानी और मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए रोज 2 किलोमीटर दूर अम्बाजा गांव तक का लंबा और पथरीला सफर तय करना पड़ता था। मामले की गंभीरता को भांपते हुए कलेक्टर माथुर ने बिना एक पल गंवाए पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री सुखराम मेडा को तत्काल निर्देश दिए। कलेक्टर की इसी तत्परता का असर था कि विभाग ने आनन-फानन में कागजी औपचारिकताएं पूरी कर भील फलिया में नवीन हैंडपंप की स्वीकृति दी और रिकॉर्ड समय में खनन कार्य पूरा कर वहां शुद्ध पेयजल उपलब्ध करा दिया ।

पारंपरिक अंदाज में सम्मान, छलकी ग्रामीणों की खुशी :- दशकों पुरानी समस्या का इतनी जल्दी समाधान होने से उत्साहित और भावुक ग्रामीण इस बार शिकायत लेकर नहीं, बल्कि धन्यवाद देने जनसुनवाई में पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर नीतू माथुर से मुलाकात कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया , ग्रामीणों ने अपनी समृद्ध परंपरा के अनुसार कलेक्टर माथुर को चोमल और टोकरी भेंट कर उनका आत्मीय सम्मान किया। ग्रामीणों का कहना था कि मैडम ने हमारे सिर से पानी का बोझ उतारा है, इसलिए यह भेंट हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है ।
केवसीय स्थानीय ग्रामीण – हम 10 साल से हैंडपंप के लिए गुहार लगा रहे थे, लेकिन हमारी सुध किसी ने नहीं ली। कलेक्टर मैडम ने हमारी तकलीफ को अपनी तकलीफ समझा और काफी कम समय में पानी की व्यवस्था कर दी। अब हमें और हमारे मवेशियों को दूर नहीं भटकना पड़ेगा ।










