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झाबुआ – कलेक्टर नेहा मीना ने वीएचएसएनडी सत्र एवं खड़कुई , वडलीपाड़ा आंगनवाड़ी केंद्रों का किया आकस्मिक निरिक्षण ।

संपादक नयन टवली की कलम से ✍️

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झाबुआ – कलेक्टर नेहा मीना द्वारा आज वडलीपाड़ा आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित वीएचएसएनडी (ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस) सत्र का निरीक्षण किया गया। इसके साथ ही खड़कुई आंगनवाड़ी केंद्र का भी औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया , निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने खड़कुई आंगनवाड़ी केंद्र के पुराने एवं जर्जर भवन में संचालित पाए जाने पर निर्देश दिए कि जिले में ऐसे सभी आंगनवाड़ी केंद्र , जो जर्जर अथवा अनुपयुक्त भवनों में संचालित हो रहे हैं, उन्हें विभागीय निर्देशानुसार तत्काल किराए के सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित किया जाए , वडलीपाड़ा केंद्र पर आयोजित वीएचएसएनडी सत्र में कलेक्टर ने एएनसी पंजीयन एवं जांच, टीकाकरण की स्थिति, हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग , आंगनवाड़ी में दर्ज बच्चों की संख्या तथा एसएएम, एमएएम एवं एसयूडब्ल्यू बच्चों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की , सीएचओ द्वारा अवगत कराया गया कि 24 बच्चों का टीकाकरण निर्धारित था , किंतु केवल 2 बच्चों का ही टीकाकरण हो सका , क्षेत्र में कुल 146 गर्भवती महिलाएं चिन्हित हैं , जिनमें से 25 हाई-रिस्क गर्भवती पाई गई हैं। हाल ही में चिन्हित 22 गर्भवती महिलाओं में से 5 का एएनसी चेकअप निर्धारित था, परंतु वे उपस्थित नहीं हुईं । इस पर कलेक्टर ने आशा कार्यकर्ताओं द्वारा समय पर सूचना एवं मोबिलाइजेशन नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की , निरीक्षण के दौरान यू-विन पोर्टल पर टीकाकरण की ऑनलाइन प्रविष्टियों एवं पोषण ट्रैकर ऐप पर निर्धारित एंट्रीज की भी जांच की गई ।

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कलेक्टर ने आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चों को प्रदत्त भोजन को स्वयं चखकर गुणवत्ता की परख की तथा समूहों को निर्देशित किया कि नाश्ता एवं भोजन निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थित रूप से प्रदान किया जाए । केंद्र में 2 एमएएम एवं 3 एसयूडब्ल्यू बच्चे चिन्हित पाए गए , वीएचएसएनडी सत्र में पाई गई अनियमितताओं पर कलेक्टर ने गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि संपूर्ण प्रकरण की विस्तृत प्रतिवेदन आज शाम तक प्रस्तुत किया जाए । साथ ही संबंधित दिवस पर बीएमओ द्वारा किए गए निरीक्षण की भी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए , कलेक्टर ने कहा कि वीएचएसएनडी सत्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला हैं । इन सत्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, टीकाकरण , कुपोषित बच्चों की पहचान , पोषण परामर्श तथा परिवारों में स्वास्थ्य जागरूकता सुनिश्चित की जाती है । उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक वीएचएसएनडी सत्र को गंभीरता एवं जवाबदेही के साथ आयोजित किया जाए तथा आशा , आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं स्वास्थ्य अमले के समन्वय से शत-प्रतिशत लक्षित हितग्राहियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए , कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को यह भी निर्देशित किया कि लेवल-1 स्तर पर आरोग्य केंद्रों को डिलीवरी पॉइंट के रूप में विकसित किया जाए , ताकि आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सके ।

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