संपादक नयन टवली की कलम से ✍️

झाबुआ – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने के उद्देश्य से प्रदेशभर में 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर 2025 तक “दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान” संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत जिले में ऐसे पशुपालकों से सीधे संपर्क किया जा रहा है जिनके पास 10 या उससे अधिक मादा पशु हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों से संवाद स्थापित कर उनके अनुभव, चुनौतियों और आवश्यकताओं को समझना तथा उन्हें आधुनिक पशुपालन तकनीक, कृत्रिम गर्भाधान और संतुलित पशु आहार से जोड़ना है , इसी क्रम में आज कलेक्टर नेहा मीना ने झाबुआ विकासखंड के कल्याणपुरा ग्राम पहुँचकर क्षेत्र के युवा पशुपालक श्री रुद्र चौहान से भेंट की , चौहान वर्तमान में पशुपालन के माध्यम से आजीविका चला रहे हैं तथा उनके पास 10 भैंसें, 2 गायें एवं 5 भैंस की बछियाएँ हैं। उन्होंने कलेक्टर को बताया कि उन्हें आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत सरकार से सहायता प्राप्त हुई है , जिसके माध्यम से उन्होंने अपने पशुपालन व्यवसाय को विस्तार दिया है , युवा पशुपालक श्री चौहान ने बताया कि उन्होंने हरियाणा के हिसार से मुर्रा नस्ल की उच्च गुणवत्ता वाली भैंसें खरीदी हैं वर्तमान में जिसका दूध स्थानीय बाजार में सप्लाई किया जाता है ।

कलेक्टर नेहा मीना ने उनकी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कम उम्र में इस तरह के प्रयास अन्य युवाओं के लिए प्रेरणादायक हैं , उन्होंने श्री चौहान को “मिल्क रूट (Milk Route)” से जोड़कर अपने व्यवसाय को व्यावसायिक स्तर पर विस्तारित करने के लिए प्रोत्साहित किया , साथ ही उन्होंने गौमूत्र के औषधीय गुणों को ध्यान में रखते हुए उसे डिस्टिलेशन तकनीक के माध्यम से औषधीय उत्पादों के निर्माण की दिशा में प्रयास करने का सुझाव दिया , कलेक्टर ने कहा कि संतुलित एवं पौष्टिक आहार ही स्वस्थ पशुधन का आधार है। उन्होंने पशुपालक को सलाह दी कि वे अपने पशुओं को समय-समय पर टीकाकरण (वैक्सीनेशन) अवश्य कराएँ और चारे में संतुलित पोषण सामग्री जैसे मिनरल मिक्सचर एवं हरा चारा सम्मिलित करें , उन्होंने यह भी कहा कि जिले के अन्य पशुपालकों को सेक्स-सॉर्टेड सीमेन द्वारा कृत्रिम गर्भाधान, उन्नत नस्लों के चयन, पौष्टिक आहार निर्माण एवं पशु स्वास्थ्य प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी देने के लिए एक प्रशिक्षण कार्यशाला (वर्कशॉप) आयोजित की जाए , इस वर्कशॉप के माध्यम से पशुपालकों को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं का प्रत्यक्ष समाधान किया जा सकेगा , राज्य स्तर से जिले के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी डॉ. भगवान मगनानी ने बताया कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में साइलेज (Silage) का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि साइलेज भूसे से कहीं अधिक पौष्टिक, स्वादिष्ट एवं सस्ता विकल्प है। यह पशुओं के पाचन के लिए भी अत्यंत लाभदायक है। डॉ. मगनानी ने बताया कि साइलेज के निर्माण के लिए मक्का की फसल सर्वाधिक उपयुक्त होती है, जो झाबुआ जिले में बड़े पैमाने पर उत्पादित होती है। उन्होंने उपस्थित पशुपालकों को घर पर ही साइलेज तैयार करने की प्रक्रिया भी समझाई , कलेक्टर ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में साइलेज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इच्छुक पशुपालकों के प्रकरण तैयार किए जाएँ तथा स्थानीय स्तर पर साइलेज की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए , ताकि पशुपालक अपनी आवश्यकताओं के साथ-साथ आसपास के गांवों के पशुपालकों को भी यह सुविधा प्रदान कर सकें , इस दौरान उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. ए.एस. दिवाकर , डॉ. अमित दोहरे सहित विभागीय अधिकारी , क्षेत्रीय पशुपालक एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे ।





