संपादक नयन टवली की कलम से ✍️

आलीराजपुर – गत दिनों एकलव्य आदर्श विद्यालय सोंडवा के प्राचार्य एवं तीन शिक्षकों की प्रताड़ना से तंग आकर पूरे स्टाफ एवं विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा बताई गई समस्या पर कैबिनेट मंत्री नागरसिंह चौहान एवं सांसद श्रीमती अनिता चौहान ने सख्त रूप दिखाते हुए प्राचार्य एवं तीन शिक्षकों पर कार्यवाही के लिए जनजातीय कार्य विभाग के केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखकर कार्यवाही की अनुशंसा कर अनुशासनात्म कार्यवाही का निवेदन करते हुए पत्र प्रेषित किए हैं , उल्लेखनीय है कि गत दिनों उमराली स्थित एकलव्य विद्यालय सोंडवा , में प्राचार्य नीलम भारती एवं उनके कु. शिवानी चौधरी , श्रीमती अन्नू मान, एवं कुलजीत राजपूत की तानाशाही और अड़ियल रवैए से पूरे शिक्षक शिक्षिकाओं सहित पूरे विद्यालय के विद्यार्थी परेशान हो गए, ओर धरने पर बैठ गए , जिसकी सूचना मिलते ही कैबिनेट मंत्री श्री नागरसिंह चौहान द्वारा अपने विधायक प्रतिनिधि गोविंदा गुप्ता एवं दिलीप चौहान को मौके पर भेजा था एवं पूरी स्थिति की जानकारी लेकर कार्यवाही के निर्देश दिए , कलेक्टर नीता माथुर भी मौके पहुंची और पूरे शैक्षणिक स्टाफ एवं विद्यार्थियों से व्यक्तिगत चर्चा कर जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारीयो को भोपाल भेजी , सांसद मिली केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से विधायक प्रतिनिधि एवं मंत्री सांसद हेल्पलाइन प्रभारी गोविंदा गुप्ता ने बताया कि प्राचार्य श्रीमती नीलम भारती, कु. शिवानी चौधरी , अन्नू मान एवं कुलजीत राजपूत के खिलाफ प्राप्त शिकायत की प्रशासनिक जांच में भी उपरोक्त चारों को दोषी पाए जाने के उपरांत कैबिनेट मंत्री चौहान एवं सांसद चौहान ने तत्काल कार्यवाही हेतु पत्र लिखने के साथ यह पत्र सांसद चौहान ने स्वयं दिल्ली में जनजातीय कार्य मंत्रालय पहुंच कर केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम से सौजन्य भेंट कर पूरी स्थिति से अवगत करवाते हुए चारों पर कार्यवाही हेतु पत्र सौंपे , सांसद श्रीमती चौहान ने केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया कि प्राचार्य नीलम भारती पर लगे सारे आरोप जांच में भी सही पाए जाने के साथ इनका यही अहंकारी एवं असौहाद्रपूर्ण व्यवहार पूर्व में एकलव्य विद्यालय पेटलावद में भी था , जिसके चलते वहां भी शिक्षकों से लेकर विद्यार्थियों ने इसी तरह आंदोलन की राह अपनाई , जिसके बाद प्राचार्य श्रीमती भारती को निलंबित किया गया था ।
प्राचार्य एवं उनके तीन सहयोगियों पर मुख्य आरोप :-
1 . अत्यधिक तनावपूर्ण एवं दमनकारी व्यवहार ।
2 . कुप्रबंधन , अस्थिर एवं मनमाना प्रशासन ।
3 . कर्मचारियों पर अनुचित दबाव डालना एवं भय का वातावरण निर्मित करना ।
4 . प्राचार्य के निकटस्थ व्यक्तियों द्वारा समस्त कार्यों में अनधिकृत हस्तक्षेप ।
5 . शिक्षकों का सार्वजनिक रूप से अपमान एवं मानहानि ।
6 . अशोभनीय एवं मर्यादाविहीन टिप्पणियाँ ।
7 . पुरुष शिक्षक का बालिका छात्रावास में अनधिकृत रूप से आवागमन ।
8 . शिकायत प्रस्तुत करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध प्रतिशोधात्मक कार्रवाई ।
9 . निरंतर मानसिक उत्पीड़न एवं कार्यस्थल पर विषाक्त वातावरण का निर्माण ।
10 . नियम विरुद्ध एवं अनुचित कार्यों के लिए दबाव बनाना।
11 . कर्मचारियों को त्यागपत्र देने के लिए विवश होना ।
12 . विद्यार्थियों को प्रदत्त भोजन की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की होना ।
13 . अन्य संबंधित गंभीर अनियमितताएँ ।





