संपादक नयन टवली की कलम से ✍️

झाबुआ – बहोत दिनों बाद आज फिर से कलम चलाने का अवसर मिला क्योकि… छोटो पर सितम और बडो पर रहम नजर आया….अभी परसो ही ग्राम गुंदीपाडा मे एक बच्ची की खुले कुए मे गिरने से मौत हुई , जबकि जिले के कप्तान ने खुले मे मौजूद कुए , बोरवेल को ढकने का आदेश साल मे कई बार जारी किए , पर जवाबदार घटना का इतंजार करते है… क्योंकि जबतक कोई घटना होंगी नहीं हम जागेंगे नहीं यह संकल्प जो ले रखा है… घटना के बाद सब जागेंगे..दौड़ेगे , कार्यवाही होंगी और फिर सब शांति… क्योंकि कहने मे यह आएगा न की हमने कार्यवाही की… पर अब क्या ज़ब 9 महीने पेट मे रख उस बच्ची को इतना बड़ा करने वाली माँ पर क्या बीतेगी… इसका भान अगर जवाबदारों को होना तो इस प्रकार की घटना ही होना बंद हो जाए…इस घटना पर एसडीएम ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया.. कलेक्टर सहाब के निर्देश पर कार्यवाही हुई , बच्ची के परिवार को मुआवजा भी मिलेगा… पटवारी , सचिव निलंबित हुए… आज पटवारी संघ ने पटवारी के निलंबित होने पर जिला कलेक्टर कार्यलय पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ हाई हाई के नारे भी लगाए… पर एक महिला पटवारी ने तहसीलदार सहाब की पोल खोल दी… उस महिला पटवारी ने साफ साफ कहा की हमने कलेक्टर के आदेश के पालन मे सभी खुले कुए एवं बोरवेल की जानकारी तहसीलदार सहाब को 2 साल पहले से ही दे दी है… तो अब सवाल यह है की दो साल से तहसीलदार सहाब क्या कर रहे थे…क्या तहसीलदार सहाब ऐसे घटना का इंतजार कर रहे थे…हम घटनाओ पर लीपा पोती करने के लिए छोटो पर सितम तो कर देते है.. पर यह बड़े जो जिनके पास जानकारी आने के बाद भी यह अपनी जम्मेदारी नहीं निभाते.. इसलिए ही किसी को माँ को अपनी बेटी खोना पड़ती है….कलेक्टर सहाब इन बडो पर भी कार्यवाही हो तब जाकर सिस्टम सुधरेगा… ताकि आने वाले समय मे कोई अपनी जवाबदारी से भागे नहीं… उसका पालन करे ताकि ऐसी घटनाएं रुके… क्योकि एसडीएम को आये तो अभी 4 महीने ही हुए पर तहसीलदार यहां काफ़ी लंबे समय से काबिज है.. और माना जाए या न माना जाए.. जिम्मेदारी तो तहसीलदार सहाब की भी थी.. पर वो बड़े है तो बचा लिए गए…क्या पता तहसीलदार सहाब को किसी सत्ता धारी नेताजी का संरक्षण प्राप्त होगा…।










