झाबुआ – मानवीय संवेदना की अनूठी मिसाल बने एसडीएम महेश मंडलोई , गांव की पगडंडियों पर पहुंचकर ग्रामीण परिवार के साथ मनाया दीपोत्सव ।

प्रधान संपादक नयन टवली की खबर ✍️


झाबुआ – अमूमन प्रशासनिक अधिकारियों की छवि आम जनता के बीच काफी सख्त और अनुशासनप्रिय मानी जाती है । लोग अधिकारियों से सीधे संवाद करने में भी हिचकिचाते हैं, लेकिन जब कोई अधिकारी अपनी इसी प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ गहरी मानवीय संवेदनाओं का परिचय देता है , तो वह सीधे लोगों के दिलों में जगह बना लेता है । कुछ ऐसा ही मनमोहक और आत्मीय नजारा शुक्रवार को झाबुआ जिले के रामा क्षेत्र के ग्राम कोकावद में देखने को मिला । अपनी उत्कृष्ट , सख्त और संवेदनशील कार्यप्रणाली के लिए पहचाने जाने वाले एसडीएम महेश मंडलोई ने इस बार दीपोत्सव का पर्व किसी वीआईपी आयोजन में मनाने के बजाय, ठेठ ग्रामीण परिवेश में एक आम आदिवासी परिवार के साथ मनाने का फैसला किया ,
शुक्रवार की शाम जब एसडीएम महेश मंडलोई ग्राम कोकावद निवासी ग्रामीण मुकेश पिता नाथू भूरिया के घर पहुंचे, तो परिवार की खुशी और अचरज का ठिकाना नहीं रहा । जिले के एक बड़े अधिकारी को अचानक अपने आंगन में खड़ा देख पहले तो ग्रामीण अचंभित रह गए, लेकिन एसडीएम मंडलोई की सादगी, मुस्कान और उनके अपनेपन ने पल भर में ही सारी झिझक और दूरियां मिटा दीं। देखते ही देखते मुकेश भूरिया के घर के आसपास रहने वाले अन्य ग्रामीण और बच्चे भी वहां जमा हो गए और पूरा माहौल किसी बड़े पारिवारिक उत्सव में तब्दील हो गया , एसडीएम मंडलोई ने सबसे पहले भूरिया परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर घर के आंगन में दीप प्रज्वलित किए और दीपोत्सव के उल्लास की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने गांव के छोटे-छोटे बच्चों के साथ जमकर आतिशबाजी की। बच्चों के साथ फुलझड़ियां और पटाखे जलाते वक्त एसडीएम भी पूरी तरह से बच्चों के रंग में रंगे नजर आए । उन्होंने सभी बच्चों और ग्रामीणों को अपने हाथों से मिठाइयां खिलाईं और उन्हें दीपावली के उपहार भी भेंट किए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे , दीपावली के इस पावन अवसर पर खुशियां बांटने का यह सिलसिला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहा , आतिशबाजी और उपहार वितरण के बाद, एसडीएम महेश मंडलोई ने भूरिया परिवार और वहां उपस्थित ग्रामीणों के साथ बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन भी किया। झाबुआ जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में एक आला दर्जे के अधिकारी का ग्रामीणों के बीच जमीन से जुड़कर इस तरह त्योहार मनाना , पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है । इस सकारात्मक पहल से प्रशासन और आम जनता के बीच आत्मीयता और विश्वास का एक नया सेतु बना है ।
एसडीएम मंडलोई :- आम आदमी के चेहरे पर मुस्कान आना चाहिए एक प्रशासक का काम केवल कानून – व्यवस्था बनाए रखना या सरकारी योजनाएं लागू करना नहीं है , बल्कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन में अपनापन और मुस्कान लाना भी है । मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि मैं आमजन के सुख-दुख का वास्तविक हिस्सा बन सकूं ।



